*_अनुचित देरी से दिया गया जवाब कोर्ट की अवमानना ही है क्योकि कानून रुक नही सकता कोर्ट चुप नही बैठ सकती :हाई कोर्ट_* इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अव...
*_अनुचित देरी से दिया गया जवाब कोर्ट की अवमानना ही है क्योकि कानून रुक नही सकता कोर्ट चुप नही बैठ सकती :हाई कोर्ट_*
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवमानना के एक मामले में कहा है कि यदि संविधान द्वारा स्थापित कानून अस्तित्व में है तो कानून का शासन प्रभावी होगा। कानून रुक नहीं सकता और न ही कोर्ट चुप रह सकती है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट ने चंद्रसखी की अवमानना याचिका पर अधिवक्ता कुंजेश दुबे को सुनकर दिया है।
मामले के तथ्यों के अनुसार कोर्ट ने याची के चिकित्सा खर्च बिल जमा करने पर उसे 26 मार्च 2020 तक नियमानुसार पास करने का निर्देश दिया था, जिसका पालन नहीं किया गया। कोर्ट ने आदेश के पालन की जानकारी मांगी। सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि कोरोना संक्रमण के कारण मांगी गई जानकारी नहीं मिल सकी है। कोर्ट ने कहा कि यह कोई अच्छा कारण नहीं है। एसएसपी को दो बार मौका दिया गया और आदेश के पालन की कोई जानकारी नहीं है। कोर्ट ने कहा कि कोविड-19 के प्रकोप के कारण देरी हो सकती है लेकिन यह भी सच है कि अधिकारी आदेश के पालन में लापरवाही बरत जा रहे हैं। पेन्डेमिक के कारण इसकी माफी नहीं दी जा सकती। जानकारी न देने का आचरण प्रथमदृष्टया कोर्ट के आदेश की अवहेलना है। सरकारी वकील के अनुरोध पर आदेश का पूर्णतया पालन करने का एक मौका दिया जा रहा है। कोर्ट ने मथुरा के एसएसपी शलभ माथुर को 13 अगस्त तक आदेश के अनुपालन की जानकारी देने एवं अब तक पालन न करने का कारण स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। यह भी कहा है कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो कोर्ट उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हाजिर होने का आदेश देगी।
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