☘️ *_करें योग रहे निरोग : आनंद बालासन : खुशी का स्वाभाविक तरीका :जानिये इस योग के लाभ और योग विधि_* आनंद बालासन के नाम पर यदि आप...
आनंद बालासन के नाम पर यदि आप गौर करे आनंद यानी ख़ुशी और बाल यानी बच्चा, अर्थात नाम से ही आप पहचान सकते है कि इस आसान को करने से पूर्ण शरीर को आराम मिलता है।
इस आसन को हैप्पी बेबी पोज़ के नाम से भी जाना जाता है और डेड बग पोज भी कहा जाता है। यह आसन शरीर पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। साथ ही इसे करने से जांघ और हिप्स भी स्लिम होते है।
यह आसन मन को शांत करने और शरीर पर पड़ने वाले तनाव को रोकने की अपनी सहज क्षमता के लिए जाना जाता है। इस आसन द्वारा शरीर के निचले हिस्से में सभी तनाव को ख़त्म करने में मदद मिलती है।
इस आसन को करने से पहले वीरासन और बालासन का अभ्यास कर सकते है। और इस आसन के बाद में अधोमुख श्वान आसन का भी अभ्यास किया जा सकता है।
*आनंद बालासन के लाभ*
आनंद बालासन को प्रतिदिन करने से कमर के निचले हिस्से को आराम मिलता है।
यह आसन पीठ और रीढ़ की हड्डी को स्ट्रेच करता है और गले के भीतरी हिस्से, आंतरिक जांघों और हैमस्ट्रिंग को भी स्ट्रेच करने में सहायक होता है।
यह आसन कंधों, कमर और छाती को खोलने में भी सहायता करता है।
यह आसन पाचन क्रिया को भी मजबूत करता है और पेट की समस्या में फायदेमंद है|
आनंद बालासन को रोज करने से पीठ में उत्पन्न तनाव को कम करने में मदद मिलती है।
नियमित रूप से इस आसन का अभ्यास दिल की दर को कम करने में मदद करता है|
*आनंद बालासन को करने की विधि*
आनंद बालासन को करने के लिए एक आसन पर पीठ के बल लेट जाए और गहरी साँस ले।
इसके बाद सांसो को छोड़ते हुए घुटनो को पेट के पास लेकर आये|
अब सांस लेते हुए अपने पैरों के तलवे को हांथो से पकडे और इसे धीरे धीरे करके ऊपर की तरफ ले जाए।
ध्यान रखें कि घुटने छाती के साइड से लगे हुए हो। साथ ही टखने घुटने की सीध में रहे।
दोनों घुटने के मध्य में थोड़ी दुरी बनाये रखे जैसा की चित्र में दिखाया गया है|
इसके बाद धीरे से अपने पैरों को ऊपर की तरफ धक्का दे और हाँथ को नीचे की तरफ खींचते हुए एक प्रतिरोध पैदा कर मांसपेशियों में तनाव को महसूस करे।
सांस लेते हुए इस आसन को 20 से 30 सेकंड तक सामान्य तरह से करे, फिर धीरे धीरे अपनी प्रारंभिक स्थिति में आ जाए।
*आनंद बालासन के दौरान सावधानियां*
अगर गर्दन और घुटने में चोट लगी है तो इस आसन को न करे।
ध्यान रखे की इस आसन को करते समय जमीन समतल होनी चाहिए।
महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान और गर्भवती महिलाओं को इस आसन का अभ्यास करने से बचना चाहिए।
आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी प्रकार की चोट से बचने के लिए इस आसन का अभ्यास करते हुए आपकी रीढ़ पूरी तरह से सीधे होई
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