*_कानून की अनुमति के बिना नागरिकों को उनकी संपत्ति से वंचित नहीं कर सकते: सुप्रीम कोर्ट_* सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बुधवार को कहा कि ...
*_कानून की अनुमति के बिना नागरिकों को उनकी संपत्ति से वंचित नहीं कर सकते: सुप्रीम कोर्ट_*
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बुधवार को कहा कि कानून के नियम से संचालित किसी लोकतांत्रिक व्यवस्था में राज्य विधि की अनुमति के बिना नागरिकों को उनकी संपत्ति से वंचित नहीं कर सकता. शीर्ष अदालत ने व्यवस्था दी कि उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना नागरिकों को उनकी निजी संपत्ति से जबरन वंचित करना मानवाधिकार और संविधान के अनुच्छेद 300 ए के तहत संवैधानिक अधिकार का भी उल्लंघन होगा.
जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस अजय रस्तोगी की पीठ ने अपने निर्णय में कहा कि विधि के नियम से संचालित राज्य, एक कल्याणकारी राज्य होने के नाते संविधान प्रदत्त दर्जे से परे नहीं जा सकता.
अदालत ने हिमाचल प्रदेश सरकर को निर्देश दिया कि वह उस निरक्षर विधवा को आठ सप्ताह के भीतर मुआवजा प्रदान करे और साथ ही सभी सांविधिक लाभ प्रदान करे जिसकी जमीन 1967-68 में हमीरपुर जिले में नदाऊं-सुजानपुर सड़क के निर्माण के लिए अधिग्रहण प्रक्रियाओं का पालन किए बिना अधिगृहीत कर ली गई थी. शीर्ष अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 136 और अनुच्छेद 142 के तहत अपने असाधारण न्याय अधिकार का इस्तेमाल करते हुए राज्य को महिला को मुआवजा प्रदान करने का आदेश दिया.
*जागरूकता के लिए शेयर अवश्य करें*






कोई टिप्पणी नहीं